बागेश्वर:ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर स्कूल छोड़ने के कारणों सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करे शिक्षा विभाग, शारीरिक दंड के मामलों में संयुक्त निरीक्षण समिति करेगी जांच

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बागेश्वर,

📌जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे की अध्यक्षता में बाल संरक्षण से संबंधित अम्ब्रेला समिति की बैठक आयोजित, विभिन्न योजनाओं एवं बाल संरक्षण प्रकरणों की समीक्षा की गई।
📌ड्रॉपआउट बच्चों की पहचान कर स्कूल छोड़ने के कारणों सहित रिपोर्ट प्रस्तुत करे शिक्षा विभाग, शारीरिक दंड के मामलों में संयुक्त निरीक्षण समिति करेगी जांच

जिलाधिकारी अपूर्वा पाण्डे की अध्यक्षता में गुरुवार को बाल संरक्षण से संबंधित अम्ब्रेला समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में बाल अधिकारों के संरक्षण, मिशन वात्सल्य योजना, बाल विवाह की रोकथाम तथा बच्चों से संबंधित विभिन्न प्रकरणों की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले शारीरिक दंड के मामलों की जांच के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, बाल कल्याण समिति (CWC) एवं उपजिलाधिकारी की संयुक्त निरीक्षण समिति गठित कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा एवं अनुकूल वातावरण बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।

पॉक्सो (POCSO) अधिनियम से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि पीड़ित बच्चों को अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े तथा उनकी गोपनीयता और गरिमा का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

जिलाधिकारी ने विद्यालय छोड़ चुके बच्चों (ड्रॉपआउट) को चिह्नित कर उनके स्कूल छोड़ने के कारणों का पता लगाने तथा उन्हें पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के निर्देश दिए। शिक्षा विभाग प्रत्येक ड्रॉपआउट बच्चे की स्थिति, विद्यालय छोड़ने के कारणों एवं आगे की कार्ययोजना सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा।

बैठक में बाल कल्याण समिति एवं किशोर न्याय बोर्ड के अंतर्गत किशोर न्याय अधिनियम, 2015 से संबंधित मामलों की त्रैमासिक समीक्षा की गई। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग को बाल विवाह से संबंधित प्रकरणों की समीक्षा करने तथा रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान ड्राॅपआउट बच्चों के साथ-साथ दिव्यांग बच्चों के चिह्नीकरण तथा विद्यालयों में बच्चों को दिए जाने वाले शारीरिक दंड से संबंधित मामलों पर चर्चा की गई। वहीं, स्वास्थ्य विभाग को पोक्सो पीड़ित बच्चों की स्वास्थ्य परीक्षण प्रक्रिया की समीक्षा करने तथा जिला चिकित्सालय में नशे में लिप्त बच्चों के लिए कक्ष आरक्षित करने से संबंधित व्यवस्थाओं पर कार्यवाही के निर्देश दिए गए।

जिलाधिकारी ने श्रम, पुलिस, पंचायतीराज सहित संबंधित विभागों को बाल कल्याण एवं संरक्षण समितियों के गठन की समीक्षा करने, नाबालिग बच्चों द्वारा यातायात नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई करने तथा जनपद में नशे के हॉटस्पॉट क्षेत्रों को चिह्नित कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी हितधारक विभागों को संयुक्त जागरूकता कार्यक्रमों के लिए कार्ययोजना तैयार कर आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा।

बैठक में मिशन वात्सल्य योजना के अंतर्गत जिला बाल कल्याण समिति द्वारा संस्तुत देखरेख एवं संरक्षण की आवश्यकता वाले 12 बच्चों को स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ प्रदान करने के प्रस्ताव को जिला प्रवर्तकता एवं देखभाल अनुमोदन समिति द्वारा अनुमोदित किया गया।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को बाल अधिकारों के संरक्षण एवं बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए आपसी समन्वय से प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार, डीपीओ डॉ मंजुलता यादव, एआरटीओ रानीखेत मुकेश चंद्र जोशी, ज़िला आबकारी अधिकारी प्रेम चन्द्र काण्डपाल, सीओ बागेश्वर अजय साह, एसीएमओ डॉ० अनुपमा हयांकी, श्रम प्रवर्तन अधिकारी मोनिका चिल्वाल, सीडब्लूसी सदस्य अशोक लोहानी, कैलाश सिंह बोरा, मंजू नगरकोटी, भारती खेतवाल आदि उपस्थित रहे।

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