उत्तराखंड:सीएम धामी ने की फ्रांस से लौटे नीरज की शानदार पहल की तारीफ,लाखों का पैकेज छोड़ अपनाया स्वरोजगार

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प्रदेश के युवा हर क्षेत्र में अपना जलवा बिखेर रहे है खेल हो या प्रशासनिक सेवा, मनोरंजन हो या स्वरोजगार हर क्षेत्र में युवा बेहतरीन कर रहे हैं पहाड़ के युवा लगातार स्वरोगार की ओर कदम बढ़ा रहे है। ऐसे में सरकार ने भी स्वरोजगार को लेकर युवाओं को पूरा सहयोग किया है। इससे पहले लाॅकडाउन में कई युवा पहाड़ लौटे और उन्होंने स्वरोजगार अपनाकर एक नई इबादत लिख दी। अब चंपावत के नीरज ने जो काम किया उसकी तारीफ प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी की। बकायदा उनकी खबर को सीएम धामी ने अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर शेयर भी किया। जी हां फ्रांस से उच्च शिक्षा प्राप्त कर उत्तराखंड लौटे चंपावत जिले के नीरज जोशी के काम की चारों ओर तरफ तारीफ हो रही है। उत्तराखंड के इस युवा की पहल मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नजरों में भी आई है। मुख्यमंत्री धामी ने अपने फेसबुक और ट्विटर पर नीरज जैसे युवाओं द्वारा स्वरोजगार के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है।बता दें कि पंतनगर विश्वविद्यालय से एमएससी और मोंटपेलियर सुपएग्रो फ्रांस से एमएस की पढ़ाई करने के बाद नीरज जोशी उत्तराखंड लौट आए। उन्होंने उत्तराखंड की मौजूदा परिस्थितियों को समझने के बाद चंपावत जिले के पाटी ब्लॉक के सुदूर करौली गांव में होम स्टे बनाने का फैसला लिया। होम स्टे बनकर तैयार है और पहली आमद विदेशों से हो भी चुकी है। नीरज बताते है कि मेरे काम के बारे में सोशल मीडिया के जरिए जब फ्रांस के दोस्तों को पता चला तो उन्होंने ही कुछ लोगों को मेरे पास भेजा। वो लोग एक समूह में यहां आए। करीब एक हफ्ता उत्तराखंड के अलग -अलग इलाकों में रहने के बाद उन्हें करौली के इस होम स्टे में ठहराया गया। यहां से जाते समय वो लोग बेहद खुश थे। उन्हें पहाड़ों की आबोहवा बहुत पसंद आईं।नीरज जोशी बताते हैं कि फ्रांस जैसी जगह से पढ़ने के बाद वापस अपने पुश्तैनी गांव लौटकर शून्य से किसी काम की शुरुआत करने का फैसला आसान नहीं था। फ्रांस में रहते हुए रोजगार के कई मौके आए। लाखों की कमाई करने के कई रास्ते सामने थे। लेकिन उत्तराखंड से लगाव पीछा नहीं छोड़ रहा था। ऐसे में वापस भारत आकर कुछ दिन विचार किया। फिर करीब 30 साल पहले पूर्वजों द्वारा बंजर छोड़ दी गई जमीन को आबाद करने का सोचा। होम स्टे एक जरिया भर है। असल में इसके जरिए ग्रामीण उत्तराखंड को रोजगार देना प्राथमिकता है। साथ ही उत्तराखंड के पर्यटन की ख्याति पूरे विश्व में पहुंचे इसकी कोशिश कर रहे हैं।नीरज कहते हैं कि कृषि से जुड़ी उनकी पढ़ाई इस काम को आगे बढ़ाने में बहुत काम आ रही है। वो यहां के किसानों की आय बढ़ाने के लिए स्मार्ट एग्रीकल्चर, मिक्स एग्रीकल्चर, औषधियों की खेती से संबंधी जानकारी ग्रामीणों से साझा करते हैं और उन्हें परंपरागत खेती के अलावा नए प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित भी करते हैं। बता दें कि चंपावत जिले के करौली में करीब तीन साल पहले ही सड़क पहुंच पाई है लेकिन डामरीकरण होना भी बाकी है। ऐसे में मुख्यमंत्री की नजर इस युवा की पहल पर पड़ना स्वरोजगार के लिए प्रयास कर रहे युवा उत्तराखंडियों के लिए शुभ संकेत जरूर है। नीरज के इस काम की तारीफ पूरे उत्तराखंड में हो रही है।

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