उत्तराखंड: बच्चों को नशे से बचाने के लिए सरकार का बड़ा प्लान, चार चरणों में चलेगा अभियान

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देहरादून: उत्तराखंड के स्कूलों को नशे से दूर रखने के लिए शिक्षा विभाग ने 2026 से 2029 तक विशेष अभियान चलाने की तैयारी की है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी SCERT ने ‘नशा मुक्त देवभूमि एवं नशा मुक्त विद्यालय अभियान 2026-2029’ का रोडमैप तैयार किया है।

इस अभियान के तहत सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के साथ ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी….जिससे बच्चों में नशे की आदत या उससे जुड़े जोखिमों की शुरुआती स्तर पर पहचान हो सके। जरूरत पड़ने पर छात्रों को काउंसलिंग और विशेषज्ञों की सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।

चार चरणों में लागू होगा अभियान
शिक्षा विभाग के अनुसार अभियान को चार चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा।

पहले चरण में 2026 के दौरान स्कूलों में जरूरी संस्थागत व्यवस्था तैयार की जाएगी और उनकी क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा।

दूसरे चरण में 2027 के दौरान जागरूकता कार्यक्रमों का विस्तार किया जाएगा और ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को इससे जोड़ा जाएगा।

तीसरे चरण में 2028 के दौरान अभियान की समीक्षा और मूल्यांकन किया जाएगा। इसके आधार पर कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने का प्रयास होगा।

चौथे चरण में 2029 तक स्कूलों में नशामुक्ति से जुड़ी स्थायी व्यवस्था और प्रमाणन प्रणाली विकसित करने की योजना है।

हर स्कूल में बनेगी एंटी ड्रग सेल
अभियान के तहत प्रदेश के स्कूलों में एंटी ड्रग सेल बनाने की योजना है। प्रत्येक विद्यालय में नोडल शिक्षक की जिम्मेदारी तय की जाएगी। ये शिक्षक विद्यार्थियों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से संपर्क करेंगे।

जो विद्यार्थी नशे के जोखिम में पाए जाएंगे, उनके लिए काउंसलिंग और रेफरल की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों को समय रहते जरूरी सहायता उपलब्ध कराना है।

जीवन कौशल और मानसिक स्वास्थ्य पर भी जोर
योजना में केवल नशे के नुकसान के बारे में जानकारी देने तक सीमित रहने के बजाय जीवन कौशल आधारित शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता और परामर्श सेवाओं को भी शामिल किया गया है।

शिक्षकों को इस संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा डिजिटल निगरानी व्यवस्था विकसित करने और अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।

सात प्रमुख बिंदुओं पर काम
SCERT के तैयार प्रारूप में अभियान के लिए सात प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इनमें जागरूकता, शुरुआती पहचान, काउंसलिंग, रेफरल व्यवस्था, पुनर्वास, विभागीय समन्वय और अनुश्रवण शामिल हैं।

इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए स्कूल स्तर पर कार्ययोजना तैयार की जाएगी। शिक्षा विभाग का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चों पर साथियों का प्रभाव अधिक होता है….इसलिए समय पर सही जानकारी और मार्गदर्शन देना जरूरी है।

कई विभाग मिलकर करेंगे काम
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग के साथ स्वास्थ्य, पुलिस और समाज कल्याण विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों का सहयोग लिया जाएगा। सामुदायिक स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने के साथ अभिभावकों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।

SCERT की निदेशक वंदना गर्ब्याल के अनुसार अभियान को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा…ताकि विद्यालयों में विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने के लिए लगातार जागरूक किया जा सके।

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