उत्तराखंड : शैलेश मटियानी शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित हुए ये 19 शिक्षक

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शैलेश मटियानी शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित हुए 19 शिक्षक, राज्यपाल ने बताया राष्ट्र के भविष्य गढ़ने वाले मार्गदर्शक, देखें लिस्ट

शिक्षक दिवस पर उत्तराखंड के 19 शिक्षकों को राज्यपाल ने सम्मानित किया, विशेष सम्मान राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता के रूप में मंजूबाला सम्मानित

देहरादून: शिक्षक दिवस के अवसर पर देशभर में कार्यक्रमों का आयोजन कर उत्कृष्ट काम कर रहे शिक्षकों को सम्मानित किया गया. इसी क्रम में देहरादून लोक भवन में शिक्षक दिवस पर आयोजित शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार समारोह के दौरान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने साल 2025 के लिए चयनित 19 शिक्षक एवं शिक्षिकाओं को सम्मानित किया. इस दौरान, शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए राज्यपाल ने कहा कि शिक्षक केवल एक पेशे से जुड़ा व्यक्ति नहीं है, बल्कि पीढ़ियों को दिशा देने वाला और राष्ट्र के भविष्य को गढ़ने वाला मार्गदर्शक होता है.

19 शिक्षकों को मिला शैलेश मटियानी शैक्षिक पुरस्कार: शिक्षक विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ संस्कार देता है. उनकी प्रतिभा को पहचानता है और उन्हें जीवन की सही दिशा दिखाता है. राज्यपाल ने कहा कि हजारों शिक्षकों के बीच चयनित होकर यह सम्मान प्राप्त करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है.

शिक्षक की सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होती, कि उसकी कक्षा के कितने विद्यार्थियों ने अच्छे अंक प्राप्त किए. बल्कि शिक्षक की वास्तविक सफलता तब है, जब किसी सामान्य परिवार का बच्चा आगे बढ़कर देश की पहचान बने और यह कहे कि सपने देखना और उन्हें पूरा करने का विश्वास उसे अपने गुरु से मिला.
-लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, राज्यपाल, उत्तराखंड-
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने शिक्षकों को किया सम्मानित: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि विद्यार्थी के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानना, उसमें आत्मविश्वास जगाना और आगे बढ़ने का साहस देना शिक्षक का सबसे महत्वपूर्ण योगदान है. हिन्दी साहित्य के संवेदनशील कथाकार शैलेश मटियानी ने पहाड़ के सामान्य जन के जीवन, संघर्ष और संवेदनाओं को अपनी लेखनी के माध्यम से सशक्त स्वर दिया. उनके नाम पर प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार शिक्षकों के समर्पण, संघर्ष, संवेदनशीलता और समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी का सम्मान है.

राज्यपाल ने बताई शिक्षकों की भूमिका: राज्यपाल ने कहा कि-

शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि बच्चों में सोचने, समझने, प्रश्न करने और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है. भविष्य की शिक्षा में तकनीक की शक्ति और शिक्षक की संवेदना का समन्वय आवश्यक है. तकनीक सीखने के नए अवसर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उन अवसरों का सही दिशा में उपयोग कराने का कार्य शिक्षक ही करेगा.
-लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह, राज्यपाल, उत्तराखंड-

हिमालयी जीवन-पद्धति हमारी अमूल्य विरासत: राज्यपाल ने कहा कि बच्चों को आधुनिक ज्ञान के साथ अपनी जड़ों से जोड़ना भी शिक्षकों का महत्वपूर्ण दायित्व है. हमारी लोकसंस्कृति, पर्यावरण, परंपराएं और हिमालयी जीवन-पद्धति हमारी अमूल्य विरासत हैं.
विद्यालय भय नहीं सीखने की शुरुआत का केंद्र: आधुनिक शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना का समन्वय बच्चों को आत्मविश्वासी, संवेदनशील और संतुलित व्यक्तित्व प्रदान कर सकता है. राज्यपाल ने कहा कि विद्यालय ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां बच्चा भय से नहीं, उत्साह से आए और प्रश्न पूछना कमजोरी नहीं, बल्कि सीखने की शुरुआत माना जाए. प्रत्येक बच्चे को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए. बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का साहस देना शिक्षकों की जिम्मेदारी है.

शिक्षा मंत्री ने सम्मानित शिक्षकों को दी बधाई: वहीं, शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि-

शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार करीब 70 हजार शिक्षकों में से 19 शिक्षकों का चयन करना चुनौतीपूर्ण काम है. उन्होंने सभी चयनित शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके उत्कृष्ट कार्य और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रमाण है. ये पुरस्कार प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कथाकार शैलेश मटियानी के नाम पर प्रदान किया जाता है.
-डॉ धन सिंह रावत, शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड-

पुस्तकालयों में शैलेश मटियानी की रजनाएं उपलब्ध होंगी: डॉ रावत ने कहा कि शैलेश मटियानी ने हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया और 100 से अधिक पुस्तकों की रचना की. प्रदेश के विद्यालयी पुस्तकालयों में शैलेश मटियानी की प्रमुख कृतियों को उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थी उनके साहित्य और लेखन से परिचित हो सकें तथा उत्तराखण्ड की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सकें.

ये गुरुजन हुए सम्मानित: शैलेश मटियानी राज्य शैक्षिक पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों में प्रारंभिक शिक्षा श्रेणी के कुल 12 शिक्षक शामिल हैं. इनमें…

विष्णुपाल सिंह नेगी (पौड़ी गढ़वाल)
लखपत सिंह रावत (चमोली)
पृथ्वी सिंह रावत (उत्तरकाशी)
वीरेंद्र सिंह रावत (देहरादून)
रोबिन कुमार (हरिद्वार)
महेश्वर प्रसाद सेमवाल (टिहरी)
शशिकांत नौटियाल (रुद्रप्रयाग)
जहीर अब्बास (चंपावत)
नौ सिंह (ऊधमसिंह नगर)
डॉ. श्वेता मजगांई (नैनीताल)
विक्रम सिंह परिहार (पिथौरागढ़)

त्रिलोक सिंह अधिकारी (अल्मोड़ा) शामिल हैं.
माध्यमिक शिक्षा श्रेणी में ये शिक्षक हुए सम्मानित: इसी तरह, माध्यमिक शिक्षा श्रेणी में कुल 06 शिक्षकों को सम्मानित किया गया. इनमें…

नरेंद्र सिंह नेगी (पौड़ी गढ़वाल)
डॉ. सुमन ध्यानी शर्मा (चमोली)
डॉ. अतुल कुमार श्रीवास्तव (देहरादून)
कमलेश पंवार (हरिद्वार)
नवीन चंद्र पंत (चंपावत)
विशन सिंह मेहता (नैनीताल) शामिल हैं
प्रशिक्षण संस्थान श्रेणी में ये शिक्षक हुए सम्मानित: इसके साथ ही प्रशिक्षण संस्थान श्रेणी में डॉ. सुबोध सिंह बिष्ट (उत्तरकाशी) और विशेष सम्मान (राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार विजेता) के रूप में मंजूबाला (चंपावत) को सम्मानित किया गया है.

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