बागेश्वर:कलश यात्रा के साथ देवी पूजा एवं दुर्गा पूजा महोत्सव का शुभारंभ

बागेश्वर। नगर में देवी एवं दुर्गा पूजा महोत्सव का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ श्रद्धा और भक्तिभाव के माहौल में हुआ। नुमाइशखेत मैदान से निकली कलश यात्रा नगर भ्रमण करते हुए सरयू घाट पहुंची। यहां श्रद्धालुओं ने सरयू नदी से जल लेकर विधि-विधान के साथ यात्रा पूरी की। इसके बाद कलश यात्रा वापस नुमाइशखेत स्थित महोत्सव स्थल पहुंची, जहां विधायक पार्वती दास ने दीप प्रज्वलित कर महोत्सव का विधिवत शुभारंभ किया। कलश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के साथ शुरू हुए महोत्सव से नगर का माहौल भक्तिमय हो गया। सरयू घाट से जल लेकर महोत्सव स्थल पहुंचने तक यात्रा में आस्था और धार्मिक उल्लास का वातावरण बना रहा। महोत्सव का शुभारंभ करते हुए विधायक पार्वती दास ने कहा कि देवी एवं दुर्गा पूजा महोत्सव हमारी धार्मिक आस्था, संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है। ऐसे आयोजन समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और एकता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने कहा कि धार्मिक महोत्सव हमारी सांस्कृतिक विरासत को संजोने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विधायक ने मां दुर्गा से सभी के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए महोत्सव के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। कलश यात्रा के साथ शुरू हुए इस महोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह का माहौल है। महोत्सव के आयोजन से नगर में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ ही क्षेत्र की पारंपरिक विरासत को आगे बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। देवी पूजा महोत्सव के संरक्षक राजेंद्र उपाध्याय ने बताया कि देवी पूजा महोत्सव का आयोजन 27 वर्षों से किया जा रहा है। यह महोत्सव नगर की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय से महोत्सव का आयोजन होना क्षेत्रवासियों की मां दुर्गा के प्रति अटूट श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता का प्रतीक है। महोत्सव के माध्यम से धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के साथ ही लोगों को एक मंच पर आने का अवसर मिलता है। वही दुर्गा पूजा महोत्सव के अध्यक्ष उमेश जोशी ने बताया कि दुर्गा पूजा महोत्सव का आयोजन 40 वर्षों से लगातार किया जा रहा है। आयोजन समाज में आपसी सहयोग,भाईचारे और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करते हैं। उन्होंने महोत्सव से जुड़े सभी लोगों और सहयोगियों का आभार जताते हुए कहा कि जनसहयोग से ही इतने वर्षों से इस धार्मिक आयोजन की परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है।


