“मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0” के अंतर्गत गरुड़, बागेश्वर में जिला स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक आयोजित

बागेश्वर, 11 अगस्त 2026: केंद्रीय रेशम बोर्ड द्वारा संचालित “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 (MRMA 2.0)” – राष्ट्रीय वृहद् रेशम प्रौद्योगिकी हस्तांतरण अभियान के अंतर्गत गरुड़, जनपद बागेश्वर में जिला स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य रेशम कृषकों तक उन्नत रेशम उत्पादन प्रौद्योगिकियों एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी पहुँचाना, उनकी क्षेत्रीय समस्याओं को समझना तथा वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों एवं कृषकों के बीच सीधे संवाद के माध्यम से रेशम उत्पादन एवं कृषकों की आय में वृद्धि के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करना था।
कार्यक्रम में श्री किशन सिंह मलड़ा, पर्यावरणविद्; डॉ. पवन सैनी, वैज्ञानिक-डी, क्षेत्रीय रेशम उत्पादन अनुसंधान केंद्र (RSRS), सहसपुर, देहरादून; डॉ. विक्रम कुमार, वैज्ञानिक-सी, पी-3 मूल बीज फार्म, माजरा, देहरादून; सुश्री मनीषा, सहायक विकास अधिकारी (ADO), गरुड़; श्री ब्रजेश रतूड़ी, जिला रेशम निरीक्षक; तथा डॉ. स्नेहा जोशी, डेमोंस्ट्रेटर एवं प्रभारी, रेशम फार्म, गरुड़ ने सहभागिता की। कार्यक्रम में 30 से अधिक रेशम कृषकों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
डॉ. विक्रम कुमार, वैज्ञानिक-सी, पी-3 मूल बीज फार्म, माजरा, देहरादून ने कार्यक्रम के दौरान कृषकों से विस्तृत संवाद किया तथा रेशमकीट पालन से संबंधित विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर जानकारी प्रदान की। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण रेशमकीट बीज के उपयोग, वैज्ञानिक पालन तकनीकों, उचित तापमान एवं आर्द्रता प्रबंधन, पालन गृह के विसंक्रमण तथा स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण कोकून फसल प्राप्त करने हेतु आवश्यक सावधानियों पर विशेष बल दिया। कृषकों द्वारा रेशमकीट पालन के दौरान आने वाली व्यावहारिक समस्याओं पर भी चर्चा की गई तथा उनके समाधान हेतु आवश्यक तकनीकी सुझाव दिए गए।
डॉ. पवन सैनी, वैज्ञानिक-डी, RSRS, सहसपुर ने कृषकों को केंद्रीय रेशम बोर्ड के “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0” राष्ट्रीय अभियान के उद्देश्यों एवं महत्व से अवगत कराया। उन्होंने कृषकों को वैज्ञानिक एवं उन्नत रेशम उत्पादन तकनीकों को अपनाने, शहतूत बागानों का बेहतर प्रबंधन करने तथा अपनी रेशमकीट पालन क्षमता बढ़ाकर कोकून उत्पादन, उत्पादकता एवं आय में वृद्धि करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वैज्ञानिक संस्थानों, राज्य रेशम विभाग एवं कृषकों के बीच बेहतर समन्वय से क्षेत्र में रेशम उद्योग को और अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान श्री किशन सिंह मलड़ा पर्यावरणविद् ने पर्वतीय क्षेत्रों में रेशम उत्पादन की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कृषकों को शहतूती रेशम उत्पादन के साथ-साथ मूगा रेशम उत्पादन (Muga Sericulture) को भी अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की उपलब्ध प्राकृतिक एवं जैविक संसाधन क्षमता का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करते हुए रेशम उत्पादन में विविधीकरण कृषकों के लिए अतिरिक्त आजीविका एवं आय के अवसर सृजित कर सकता है।
सुश्री मनीषा, ADO, गरुड़; श्री ब्रजेश रतूड़ी, जिला रेशम निरीक्षक तथा डॉ. स्नेहा जोशी, डेमोंस्ट्रेटर एवं प्रभारी, रेशम फार्म, गरुड़ ने कृषकों के साथ संवाद करते हुए क्षेत्र में संचालित रेशम उत्पादन गतिविधियों, शहतूत पौधरोपण, बागान प्रबंधन एवं रेशमकीट पालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की। कृषकों को उपलब्ध संसाधनों एवं विभागीय सहयोग का अधिकतम लाभ उठाते हुए वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
बैठक के दौरान कृषकों के साथ शहतूत पौधरोपण एवं बागान प्रबंधन, गुणवत्तापूर्ण पत्ती उत्पादन, रेशमकीट पालन, रोग एवं कीट प्रबंधन, पालन गृह विसंक्रमण, कोकून उत्पादन एवं विपणन से संबंधित विभिन्न समस्याओं पर विस्तृत एवं सहभागितापूर्ण चर्चा की गई। कृषकों द्वारा उठाई गई समस्याओं पर वैज्ञानिकों एवं विभागीय अधिकारियों द्वारा व्यावहारिक तकनीकी सुझाव एवं समाधान प्रदान किए गए।
कार्यक्रम ने वैज्ञानिकों, राज्य रेशम विभाग एवं रेशम कृषकों के बीच सीधे संवाद और अनुभव साझा करने का एक प्रभावी मंच प्रदान किया। कृषकों से प्राप्त सुझावों एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं को बागेश्वर जिले में रेशम उत्पादन को सुदृढ़ करने हेतु जिला स्तरीय कार्ययोजना तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण आधार के रूप में संकलित किया गया।
यह कार्यक्रम “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0” अभियान के अंतर्गत वैज्ञानिक तकनीकों को कृषकों के द्वार तक पहुँचाने, क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान करने, शहतूती रेशम के साथ मूगा रेशम उत्पादन की संभावनाओं को बढ़ावा देने तथा बागेश्वर जिले में टिकाऊ, उत्पादक एवं लाभकारी रेशम उद्योग के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।

