बागेश्वर: कपकोट के पीएम श्री आदर्श प्राथमिक विद्यालय में शैक्षिक भ्रमण,नवाचार आधारित शिक्षण प्रणाली से प्रभावित हुआ दल
बागेश्वर: शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पद्धतियों को समझने के उद्देश्य से पीएम श्री आदर्श प्राथमिक विद्यालय कपकोट में एक विशेष शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान चमोली के मुख्य शिक्षा अधिकारी और डायट प्राचार्य आकाश सारस्वत के नेतृत्व में शिक्षकों, डायट प्रशिक्षुओं और संकाय सदस्यों के दल ने विद्यालय की कार्यप्रणाली का गहन अवलोकन किया। विद्यालय पहुंचने पर प्रबंधक, प्रधानाध्यापिका मंजू गढ़िया एवं समस्त स्टाफ द्वारा अतिथि दल का पारंपरिक अंदाज में भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद आयोजित प्रार्थना सभा में छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक शैली में स्वागत गीत, प्रेरणादायक विचार और अनुशासनपूर्ण प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया। प्रार्थना सभा को संबोधित करते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने विद्यार्थियों को जीवन में सफलता के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन और आदर्श मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा दी। उन्होंने बताया कि इस शैक्षिक भ्रमण दल में कुल 44 सदस्य शामिल हैं, जिनमें 24 डीएलएड प्रशिक्षु, 6 शिक्षक और 8 वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य शामिल हैं।वहीं बीईओ पोखरी विनोद सिंह मटुड़ा ने कहा कि यह भ्रमण प्रशिक्षुओं के लिए व्यवहारिक सीख का एक उत्कृष्ट अवसर है। उन्होंने विद्यालय की सराहना करते हुए कहा कि अपनी विशिष्ट कार्यशैली और नवाचारी प्रयासों के कारण यह विद्यालय आज राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहा है। भ्रमण के दौरान विद्यालय के प्रधानाध्यापक के.डी. शर्मा ने जानकारी दी कि वर्ष 2016 में आकाश सारस्वत द्वारा इस विद्यालय की नींव रखी गई थी, जिसके बाद से यह लगातार प्रगति के नए आयाम स्थापित कर रहा है। उन्होंने विद्यालय में संचालित स्मार्ट कक्षाओं, आधुनिक शिक्षण तकनीकों और छात्र-केंद्रित गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। डीएलएड प्रशिक्षुओं ने विद्यालय की स्मार्ट क्लास व्यवस्था, नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति और अनुशासित वातावरण का अवलोकन करते हुए इसे अपने लिए प्रेरणास्रोत बताया। प्रशिक्षुओं ने संकल्प लिया कि वे भविष्य में शिक्षक बनकर इसी प्रकार की प्रतिबद्धता और समर्पण के साथ शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देंगे।यह शैक्षिक भ्रमण कार्यक्रम न केवल शिक्षकों और प्रशिक्षुओं के लिए सीखने का मंच बना, बल्कि शिक्षा में नवाचार और गुणवत्ता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुआ।

