उत्तराखंड: ज्योलीकोट में दूषित पानी से बिगड़े हालात, 2 लोगों की मौत और 200 से अधिक बीमार

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नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में दूषित पानी की समस्या गंभीर होती नजर आ रही है। क्षेत्र में पीलिया, डायरिया और टायफाइड जैसे मामलों के बीच दो लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं 200 से अधिक लोगों के बीमार होने की बात कही जा रही है। इसके बाद इलाके में लोगों की चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक ज्योलीकोट में पिछले करीब तीन महीने से डायरिया और संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें की जा रही थीं। अब दो मौतों के बाद लोगों ने संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

बीमारी के बाद 16 वर्षीय छात्र की मौत
ज्योलीकोट के रहने वाले 16 वर्षीय रितेश जीना की भी बीमारी के दौरान मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, उसे उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत थी। हालत बिगड़ने पर उसे हल्द्वानी से दिल्ली ले जाया गया।
परिजनों के अनुसार, दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने लिवर ट्रांसप्लांट की जरूरत बताई थी। इसके लिए करीब एक करोड़ रुपये का खर्च बताया गया था। हालांकि इलाज के दौरान रितेश ने दम तोड़ दिया।

दूसरी मौत से बढ़ी चिंता
ज्योलीकोट निवासी नीमा जोशी की भी इलाज के दौरान मौत हो गई। बुखार के बाद जांच में लिवर संक्रमण और पीलिया की बात सामने आई थी। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें बरेली के राममूर्ति अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई।बताया गया कि नीमा जोशी क्षेत्र में पानी की समस्या को लेकर ग्रामीणों के साथ आवाज उठा रही थीं। वह ग्रामीणों के साथ धरने में भी शामिल हुई थीं।

200 से ज्यादा लोगों के बीमार होने की जानकारी
क्षेत्र में 200 से अधिक लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है। कई मरीज अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी साफ करने के बाद भी उसमें मलबा दिखाई देता है।

लोगों की मांग है कि पानी के स्रोत और सप्लाई लाइन की जांच कराई जाए…ताकि यह पता चल सके कि आखिर दूषित पानी की समस्या कहां से पैदा हो रही है।

पानी के स्रोतों की जांच और क्लोरीनेशन
ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट के अनुसार जल संस्थान और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ पानी के स्रोतों का निरीक्षण किया गया है। संदिग्ध स्रोतों को बदलने की कोशिश भी की गई है।लोगों की मांग है कि पानी के स्रोत और सप्लाई लाइन की जांच कराई जाए…ताकि यह पता चल सके कि आखिर दूषित पानी की समस्या कहां से पैदा हो रही है।

पानी के स्रोतों की जांच और क्लोरीनेशन
ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट के अनुसार जल संस्थान और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के साथ पानी के स्रोतों का निरीक्षण किया गया है। संदिग्ध स्रोतों को बदलने की कोशिश भी की गई है।
इसके अलावा पानी के स्रोतों और टैंकों में क्लोरीनेशन कराया गया है। इसके बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होने की बात कही जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई स्वास्थ्य सुविधाएं
नैनीताल की सीएमओ डॉ. रश्मि पंत ने लोगों से घबराने के बजाय सावधानी बरतने की अपील की है। उन्होंने बताया कि ज्योलीकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चार अतिरिक्त बेड बढ़ाए गए हैं। डॉक्टरों की संख्या और ड्यूटी भी बढ़ाई गई है।

सीएमओ ने लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह दी है। उन्होंने खुले स्रोतों का पानी नहीं पीने और कटे हुए फल-सब्जियों से बचने की अपील भी की है।

दूषित पानी की वजह का पता लगाना चुनौती
ग्रामीणों की शिकायतों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पानी दूषित होने की असली वजह क्या है। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से पानी के स्रोतों और स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

फिलहाल लोगों से सावधानी बरतने और किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करने की अपील की गई है।

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