बागेश्वर:30 सीटर बस में ओवरलोडिंग , एआरटीओ की बड़ी कार्रवाई – बस सीज, 11 हजार का जुर्माना

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बागेश्वर। पहाड़ी जिलों में ओवरलोडिंग की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। पुलिस और परिवहन विभाग की नियमित चेकिंग के बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। सोमवार को एक बार फिर ऐसा ही मामला सामने आया, जब 30 सीट क्षमता वाली बस में 54 यात्रियों को बैठाकर सफर कराया जा रहा था। एआरटीओ अमित कुमार अपनी टीम के साथ तहसील क्षेत्र में चेकिंग अभियान चला रहे थे। इसी दौरान दोपहर करीब एक बजे तहसील फायर विभाग के पास हल्द्वानी से बागेश्वर की ओर आ रही केएमओयू बस संख्या यूके 04 पीए 2524 को रोका गया। जांच के दौरान पाया गया कि बस में निर्धारित क्षमता से लगभग दोगुनी सवारियां भरी गई थीं, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो गया था। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एआरटीओ ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बस को सीज कर दिया और वाहन चालक पर 11 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। विभाग ने स्पष्ट किया कि ओवरलोडिंग के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पहाड़ में हादसों की बड़ी वजह ओवरलोडिंग

अधिकारियों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली अधिकांश सड़क दुर्घटनाओं के पीछे ओवरलोडिंग एक प्रमुख कारण है। संकरी और घुमावदार सड़कों पर क्षमता से अधिक सवारियां वाहन के संतुलन को बिगाड़ देती हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।

पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा समय-समय पर संयुक्त चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद ओवरलोडिंग पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पा रहा है। इसमें केवल वाहन चालक ही नहीं, बल्कि जल्दी पहुंचने की मजबूरी में यात्री भी अनजाने में इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देते हैं।

एआरटीओ अमित कुमार ने बताया कि ओवरलोडिंग से न केवल दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है, बल्कि इससे सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचता है। अधिक भार के कारण सड़कें जल्दी टूटती हैं, जिससे मरम्मत पर अतिरिक्त खर्च आता है और आम जनता को असुविधा झेलनी पड़ती है। उन्होंने चेतावनी दी कि आगे भी चेकिंग अभियान लगातार जारी रहेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत ऐसे मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

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