राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों एवं निर्णयों के अनुपालन तथा बागेश्वर जनपद की जिला पर्यावरण योजना के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा हेतु एक बैठक का आयोजन कौसानी में किया गया

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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेशों एवं निर्णयों के अनुपालन तथा बागेश्वर जनपद की जिला पर्यावरण योजना के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा हेतु एक बैठक का आयोजन दिनांक 04 जून, 2026 को कौसानी में किया गया। बैठक की अध्यक्षता माननीय डॉ. अफरोज अहमद, सदस्य / न्यायाधीश, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी), प्रधान पीठ, नई दिल्ली द्वारा की गई। बैठक में श्री आदित्य रत्न, प्रभागीय वनाधिकारी बागेश्वर, श्री एन. एस. नबियाल, अपर जिलाधिकारी, श्री वैभव कांडपाल, उपजिलाधिकारी, जिला विकास अधिकारी, वन क्षेत्राधिकारी बैजनाथ, तहसीलदार गरुड, सहित सिंचाई विभाग, जल संस्थान, लोक निर्माण विभाग, नगर पालिका, नगर पंचायत, पंचायती राज विभाग, विकास खंड कार्यालयों एवं नमामि गंगे कार्यक्रम के अधिकारियों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम के दौरान जी.बी. पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान (GBPNIHE) के वैज्ञानिक डॉ. सुमित राय द्वारा जनपद की जिला पर्यावरण योजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसके अतिरिक्त नमामि गंगे के जिला परियोजना अधिकारी श्री विवेक परिहार द्वारा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विषय पर प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुतीकरण में जनपद में संचालित विभिन्न नवाचारों एवं श्रेष्ठ प्रथाओं की जानकारी दी गई, जिसमें वन विभाग बागेश्वर द्वारा विश्व प्रसिद्ध पिण्डारी ग्लेशियर को प्लास्टिक / कचरा मुक्त किये जाने हेतु FDR जमा किये जाने तथा घर-घर कूड़ा संग्रहण, स्रोत स्तर पर अपशिष्ट पृथक्करण, शिकायत निवारण हेतु क्यूआर कोड प्रणाली तथा जनसहभागिता बढ़ाने के लिए स्वच्छता अभियान प्रमुख रहे। इन प्रयासों की विस्तृत जानकारी प्रभागीय वनाधिकारी बागेश्वर द्वारा भी साझा की गई। माननीय डॉ. अफरोज अहमद ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की वर्तमान व्यवस्था, अपशिष्ट निस्तारण हेतु भूमि की उपलब्धता, लिगेसी वेस्ट के प्रबंधन, सीवेज निस्तारण, ई-वेस्ट प्रबंधन, ग्राम पंचायत स्तर पर अपशिष्ट प्रबंधन तथा जनसहभागिता से संबंधित विषयों पर विस्तृत जानकारी प्राप्त की। नगर पालिका बागेश्वर के अधिशासी अधिकारी द्वारा इन विषयों पर विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। माननीय सदस्य न्यायाधीश ने प्रस्तुतियों एवं चर्चा का संज्ञान लेते हुए कहा कि यदि अपशिष्ट का समुचित पृथक्करण एवं प्रबंधन किया जाए तो वही अपशिष्ट ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। इससे अपशिष्ट संग्रहण एवं पुनर्चक्रण से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी सृजित किए जा सकते है। उन्होंने निर्देशित किया कि प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की पहचान की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी प्रकार का ठोस अपशिष्ट अथवा सीवेज इनमें प्रवाहित न हो। उन्होंने कहा कि हिमालय एवं वन क्षेत्र जल के महत्वपूर्ण स्रोत है और इनके संरक्षण के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। माननीय सदस्य न्यायाधीश ने क्षेत्र में रिंगाल बांस एवं खट्टे फलों (सिट्रस) पर आधारित उत्पादों के माध्यम से स्थानीय आजीविका एवं आर्थिक विकास की संभावनाओं पर भी बल दिया। कार्यक्रम के अंत में राज्य अतिथि गृह, कौसानी परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें माननीय डॉ. अफरोज अहमद, प्रभागीय वनाधिकारी बागेश्वर, अपर जिलाधिकारी एवं उपजिलाधिकारी गरुड द्वारा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।

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