उत्तराखंड में 8 नए ईको टूरिज्म हब बनाने की तैयारी, पर्यटकों को मिलेगा नया अनुभव

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देहरादून: उत्तराखंड में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग नई पहल करने जा रहा है। मसूरी के पास स्थित जबरखेत नेचर रिजर्व की तर्ज पर अब राज्य के आठ वन क्षेत्रों को ईको टूरिज्म हब के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे प्रकृति आधारित पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी तैयार होंगे।
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देश के बाद वन विभाग ने इस योजना पर काम तेज कर दिया है। विभाग ने ऐसे आठ स्थानों का चयन किया है…जहां पहले से वन विश्राम गृह मौजूद हैं। इन स्थानों को पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित किया जाएगा।
वन विभाग का उद्देश्य प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखते हुए ट्रेकिंग, बर्ड वॉचिंग और नेचर ट्रेल जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा…वहीं स्थानीय युवाओं को नेचर गाइड, होमस्टे और पर्यटन से जुड़े अन्य कार्यों में रोजगार के अवसर मिलेंगे।

मुख्य वन संरक्षक पी.के. पात्रो ने बताया कि जबरखेत मॉडल का अध्ययन पूरा हो चुका है। अब उसी अनुभव के आधार पर चयनित स्थानों की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
इन स्थानों को बनाया जाएगा ईको टूरिज्म हब

महेशखान (नैनीताल)

नैना-किलबरी (नैनीताल)

रोशलीखाल-खुरैत सौड़ (नरेंद्रनगर)

नीरगाड-कुंजापुरी (नरेंद्रनगर)

कौड़िया (नई टिहरी)

गंगोत्री पांडव गुफा (उत्तरकाशी)

बिनसर (अल्मोड़ा)

बिनोग (मसूरी)

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