उत्तराखंड:धराली में मलबे के नीचे दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर की तलाश शुरू, 100 साल पुराना है इतिहास
उत्तरकाशी: उत्तराखंड के धराली गांव में आपदा के मलबे में दबे प्राचीन कल्प केदार मंदिर को खोजने की मुहिम शुरू हो गई है करीब एक साल पहले आई विनाशकारी आपदा के बाद मंदिर को बाहर निकालने के लिए ग्रामीणों ने खुदाई का काम शुरू किया है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस प्रयास से क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को दोबारा सामने लाया जा सकेगा।
नवरात्रि के पहले दिन रविवार को गांव के आराध्य समेश्वर देवता की देवडोली के सानिध्य में पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मंदिर की खोज के लिए खुदाई शुरू हुई। मंदिर समिति के अनुसार आपदाओं के कारण इस मंदिर को खोजने के लिए इतिहास में पहले भी कई बार प्रयास किए जा चुके हैं।
मलबे में करीब 25 फीट नीचे दबा होने का अनुमान
धराली का कल्प केदार मंदिर स्थानीय लोगों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है यह मंदिर धार्मिक महत्व के साथ क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत से भी जुड़ा हुआ है पिछले साल अगस्त में आई आपदा के दौरान भारी मात्रा में मलबा जमा होने से मंदिर दब गया था।
ग्रामीणों का अनुमान है…कि मंदिर जमीन के नीचे करीब 25 फीट तक दबा हो सकता है। फिलहाल ग्रामीण अपने स्तर पर मलबा हटाने में जुटे हैं। मंदिर समिति का कहना है कि मंदिर के अवशेष मिलने के बाद उसके संरक्षण और जीर्णोद्धार की योजना पर आगे काम किया जाएगा।
पहले भी कई आपदाओं का सामना कर चुका है मंदिर
कल्प केदार मंदिर का इतिहास पुरानी आपदाओं से जुड़ा हुआ है। मंदिर समिति के सदस्य संजय पंवार के अनुसार बुजुर्गों से मिली जानकारी में वर्ष 1803 की आपदा का जिक्र मिलता है बताया जाता है…कि उस समय बाढ़ के कारण मंदिर बह गया था। उस दौर में इस क्षेत्र में करीब 204 मंदिरों का समूह होने की बात भी कही जाती है।
इसके बाद वर्ष 1887 में यहां तीन मंदिर दिखाई देने का उल्लेख मिलता है। वर्ष 1926 में आई एक अन्य आपदा के दौरान मुख्य कल्प केदार मंदिर का कुछ हिस्सा जमीन में दब गया था…जबकि दूसरे छोटे मंदिर बह गए थे।
बताया जाता है कि वर्ष 1926 की आपदा के बाद ग्रामीणों ने खुदाई करके मुख्य मंदिर को दोबारा बाहर निकाला था। अब लगभग एक सदी बाद एक बार फिर ग्रामीण इसी ऐतिहासिक मंदिर को खोजने में जुटे हैं।
मंदिर के पुनर्निर्माण की उम्मीद
कल्प केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेश पंवार के अनुसार, समेश्वर देवता की देवडोली के सानिध्य में खुदाई शुरू की गई है। मुख्यमंत्री की ओर से भी मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा की गई है। समिति का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर मंदिर की खोज और पुनर्निर्माण से जुड़े विषयों पर चर्चा करेगा।
धराली में आपदा के बाद गांव को फिर से बसाने और लोगों का जीवन सामान्य करने की चुनौती बनी हुई है। इसी बीच ग्रामीणों ने मंदिर को दोबारा खोजने का संकल्प लिया है। अब सबकी नजरें खुदाई के दौरान मिलने वाले अवशेषों पर टिकी हैं। यदि मंदिर के अवशेष मिलते हैं…तो उसके संरक्षण और पुनर्निर्माण की दिशा में आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
ग्रामीणों के लिए यह अभियान केवल एक मंदिर की खोज नहीं…बल्कि अपनी पुरानी परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत को बचाने की कोशिश भी है।


