वैज्ञानिक तकनीकों से समृद्ध होगा रेशम उत्पादन, बागेश्वर में किसानों को किया गया जागरूक

बागेश्वर। “मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0” कार्यक्रम के अंतर्गत बागेश्वर जिले में रेशम किसानों के लिए जागरूकता एवं तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक रेशम कीट पालन, नवीन तकनीकों, कीटाणुशोधन तथा स्वच्छता प्रबंधन की जानकारी प्रदान कर उन्हें आधुनिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।
गरुड़ में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को वैज्ञानिक रेशम कीट पालन की विभिन्न तकनीकों के साथ-साथ रेशम उत्पादन के क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों एवं नवाचारों के बारे में जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि वैज्ञानिक तरीके से रेशम कीटों का पालन करने, उचित प्रबंधन अपनाने तथा नवीन तकनीकों का उपयोग करने से स्वस्थ कीट पालन, बेहतर कोकून उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि की जा सकती है। किसानों को इन तकनीकों को अपने खेत एवं पालन गृह स्तर पर अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान किसानों के साथ रेशम पालन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं एवं उनके वैज्ञानिक समाधान पर भी चर्चा की गई। किसानों ने विशेषज्ञों से संवाद करते हुए अपनी जिज्ञासाओं एवं अनुभवों को साझा किया। कार्यक्रम में किसानों की सक्रिय भागीदारी रही और उन्होंने आधुनिक रेशम पालन तकनीकों को अपनाने में विशेष रुचि दिखाई।
इसी क्रम में स्याल्दे गांव में “कीटाणुशोधन एवं स्वच्छता प्रबंधन” विषय पर तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। रेशम कीट पालन में स्वच्छता एवं उचित कीटाणुशोधन के महत्व को समझाते हुए किसानों को बताया गया कि पालन गृह की साफ-सफाई तथा वैज्ञानिक तरीके से कीटाणुशोधन करने से रोगों के प्रकोप को कम करने और स्वस्थ रेशम कीट पालन में सहायता मिलती है।
किसानों की बेहतर समझ के लिए संसाधन व्यक्ति द्वारा कीटाणुशोधन एवं स्वच्छता प्रबंधन की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से किसानों को प्रक्रिया, आवश्यक सावधानियों एवं अपनाई जाने वाली तकनीकों की जानकारी दी गई, जिससे वे इन उपायों को अपने रेशम कीट पालन गृह में प्रभावी ढंग से लागू कर सकें।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. विक्रम कुमार, वैज्ञानिक-सी एवं श्री के. एस. चौहान, एस.टी.ए. द्वारा राज्य के अधिकारियों श्री बृजेश रतूड़ी, जिला नोडल अधिकारी एवं डॉ. स्नेहा जोशी, ब्लॉक नोडल अधिकारी के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रमों में क्षेत्र के किसानों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया तथा वैज्ञानिक रेशम पालन, स्वच्छता प्रबंधन और नवीन तकनीकों को अपनाने में विशेष रुचि दिखाई। किसानों को बताया गया कि आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर रेशम उत्पादन की गुणवत्ता एवं उत्पादकता में सुधार के साथ-साथ उनकी आय में भी वृद्धि की जा सकती है।


