उत्तराखंड : भारी बर्फबारी के बीच 15,092 फीट की ऊंचाई पर ‘कनाकाटा पास’ फतह

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​अदम्य साहस: भारी बर्फबारी के बीच 15,092 फीट की ऊंचाई पर ‘कनाकाटा पास’ फतह, ग्लेशियरों के गिरते स्वास्थ्य पर जताई चिंता

​बागेश्वर/सुंदरढूंगा: हिमालयी पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता और जलवायु परिवर्तन के जमीनी अध्ययन के उद्देश्य से, पर्यावरण प्रेमी चंदन सिंह नयाल और उनकी टीम ने बागेश्वर जिले के दुर्गम सुंदरढूंगा ग्लेशियर क्षेत्र में स्थित ‘कनाकाटा पास’ (Kanakata Pass) ट्रैक को सफलतापूर्वक पूरा किया। 15,092 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित इस दर्रे तक पहुंचने का यह साहसिक अभियान मात्र 3 दिनों के भीतर (5 मई से 7 मई, 2026) जातोली से जातोली तक पूरा किया गया।​चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अभियान
​यह अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि पूरी चढ़ाई के दौरान क्षेत्र में लगातार भारी बर्फबारी हो रही थी। टीम का नेतृत्व एनआईएम (NIM) प्रशिक्षित अनुभवी गाइड जीतू दानू ने किया, जिनके साथ मोहन दानू भी शामिल रहे। शून्य से नीचे के तापमान और कठिन चढ़ाई के बावजूद टीम ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए इस लक्ष्य को प्राप्त किया।
​अध्ययन का मुख्य उद्देश्य: हिमालय में खतरनाक बदलाव
​इस ट्रैक का मुख्य उद्देश्य केवल पर्वतारोहण नहीं, बल्कि हिमालय में हो रहे पर्यावरणीय बदलावों का प्रत्यक्ष अवलोकन करना था। अभियान के बाद चंदन सिंह नयाल ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि:
​”इस वर्ष सर्दियों में बर्फबारी बेहद कम हुई, जिससे ग्लेशियरों को मिलने वाली प्राकृतिक मजबूती नहीं मिल पाई। वर्तमान में (मई माह में)जो बर्फबारी हो रही है, वह कच्ची है और तापमान बढ़ते ही तुरंत पिघल रही है। यह ‘ग्लेशियर फॉर्मेशन’ के लिए शुभ संकेत नहीं है। यदि समय रहते हमने हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले समय में जल संकट और भी गहरा सकता है।”
​जागरूकता का संदेश
​टीम ने इस ट्रैक के माध्यम से संदेश दिया है कि हिमालय के ग्लेशियर हमारे अस्तित्व की जीवन रेखा हैं। सर्दियों में कम बर्फबारी और असमय हो रही कच्ची बर्फबारी जलवायु परिवर्तन के स्पष्ट संकेत हैं, जिनका सीधा असर नीचे तराई में बहने वाली नदियों और जनजीवन पर पड़ेगा।
​प्रमुख बिंदु (Media Highlights):
​स्थान: कनाकाटा पास, सुंदरढूंगा ग्लेशियर क्षेत्र (बागेश्वर)।
​ऊंचाई: 15,092 फीट।
​अवधि: 5 मई से 7 मई 2026 (रिकॉर्ड 3 दिन में जातोली से जातोली)।
​मार्गदर्शक: एनआईएम प्रशिक्षित जीतू दानू एवं मोहन दानू।
​मुख्य चिंता: सर्दियों में कम हिमपात और वर्तमान बर्फबारी का तुरंत पिघलना।

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