उत्तराखंड: M.A. और आपदा प्रबंधन की पढ़ाई के बाद खेती चुनी, 40 नाली जमीन पर विनोद ने खड़ा किया नया मॉडल

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चंपावत: पहाड़ों में खेती को सिर्फ परंपरागत काम मानने के बजाय युवा अब इसे रोजगार और आत्मनिर्भरता का जरिया भी बना रहे हैं। चंपावत के बाराकोट विकासखंड के च्यूरानी गांव निवासी विनोद सिंह ने अपनी पैतृक जमीन पर आधुनिक खेती और बागवानी का मॉडल तैयार किया है।

एमए और आपदा प्रबंधन में डिप्लोमा कर चुके विनोद सिंह ने नौकरी की तलाश के बजाय अपनी 40 नाली कृषि भूमि पर खेती शुरू करने का फैसला लिया। इसमें उन्हें उद्यान विभाग की तकनीकी मदद और विभागीय योजनाओं का लाभ मिला।
विनोद ने अपनी जमीन पर पॉलीहाउस तैयार किया है। इसके साथ ही सिंचाई के लिए पानी का टैंक और जैविक खाद तैयार करने के लिए वर्मीकम्पोस्ट इकाई भी बनाई है। पॉलीहाउस में मौसम के विपरीत परिस्थितियों में भी बेमौसमी सब्जियों की पौध और फसल तैयार की जा रही है।
वहीं खुले खेतों और ढलानों पर बंद गोभी, फूल गोभी, मूली, फ्रासबीन, कद्दू, लौकी और ककड़ी जैसी सब्जियों की खेती की जा रही है। इसके अलावा विनोद ने आम, अमरूद और अनार का फलोद्यान भी तैयार किया है।
वर्ष 2025-26 में विनोद सिंह को अलग-अलग फसलों और फलों से अच्छी पैदावार मिली। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने 12 क्विंटल बंद गोभी, 10 क्विंटल शिमला मिर्च, 10 क्विंटल आम, 10 क्विंटल अमरूद और 7 क्विंटल मूली का उत्पादन किया।

विनोद खेती में रासायनिक खाद के बजाय अपनी वर्मीकम्पोस्ट खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे खेती की लागत कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने पर भी जोर दिया जा रहा है।
अब विनोद का कृषि प्रक्षेत्र आसपास के किसानों और युवाओं के लिए सीखने की जगह बन रहा है। स्थानीय काश्तकार यहां पॉलीहाउस के संचालन, जल संचयन और जैविक बागवानी से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी ले रहे हैं।

सरकार की ओर से पर्वतीय क्षेत्रों में आधुनिक कृषि और उद्यानिकी को बढ़ावा देने की कोशिशों के बीच विनोद सिंह का मॉडल यह दिखाता है कि पहाड़ों में उपलब्ध जमीन और आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर खेती को रोजगार का जरिया बनाया जा सकता है।

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