माँ भगवती मंदिर बदियाकोट के पुनर्निर्माण के नाम पर निजी खातों में धनराशि न दें श्रद्धालु : मंदिर कमेटी

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माँ भगवती मंदिर बदियाकोट के पुनर्निर्माण के नाम पर निजी खातों में धनराशि न दें श्रद्धालु : मंदिर कमेटी

मंदिर कमेटी द्वारा आधिकारिक बैंक खाता, IFSC कोड एवं QR कोड जारी होने तक दानराशि न देने की अपील। मंदिर का पुनर्निर्माण पारंपरिक हिमालयी एवं हूण स्थापत्य कला शैली में उसी प्राचीन स्थल पर होगा।

बदियाकोट (बागेश्वर): प्राचीन आदि शक्ति माँ भगवती मंदिर बदियाकोट के पुनर्निर्माण को लेकर मंदिर कमेटी ने समस्त श्रद्धालुओं, भक्तजनों एवं दानदाताओं से महत्वपूर्ण अपील की है। मंदिर कमेटी ने स्पष्ट किया है कि जब तक कमेटी द्वारा अपना आधिकारिक बैंक खाता नंबर, IFSC कोड एवं QR कोड सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किया जाता, तब तक कोई भी श्रद्धालु मंदिर पुनर्निर्माण के नाम पर किसी व्यक्ति विशेष अथवा अन्य निजी बैंक खाते में दान या सहयोग राशि जमा न करें।

मंदिर कमेटी के अनुसार, सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से जानकारी मिल रही है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा अपने व्यक्तिगत बैंक खातों, IFSC कोड एवं QR कोड सार्वजनिक कर मंदिर पुनर्निर्माण के नाम पर धनराशि मांगी जा रही है। कमेटी ने इसे अनुचित बताते हुए स्पष्ट किया कि मंदिर के नाम पर धनराशि एकत्र करने का अधिकार आधिकारिक व्यवस्था के माध्यम से ही सुनिश्चित किया जाएगा।

मंदिर कमेटी के अध्यक्ष श्री भरत सिंह दानू एवं पूर्व ब्लॉक प्रमुख कपकोट तथा भाजपा पंचायत प्रकोष्ठ उत्तराखंड के प्रदेश संयोजक श्री गोविन्द सिंह दानू ने सभी दानदाताओं एवं श्रद्धालुओं से अपील की है कि आधिकारिक बैंकिंग विवरण जारी होने तक किसी भी खाते में धनराशि न भेजें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साइबर ठगी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में मंदिर के नाम पर किसी भी प्रकार की आर्थिक धोखाधड़ी अथवा बदनामी की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए।

धार्मिक विधि-विधान के बाद होगा मंदिर का पुनर्निर्माण

मंदिर कमेटी ने बताया कि माँ भगवती के देव डंगरियों, आचार्यों, विद्वान पंडितों एवं कुल पुरोहितों से विचार-विमर्श तथा माँ भगवती से अनुमति प्राप्त करने के पश्चात मंदिर पुनर्निर्माण का निर्णय लिया गया है। इसके अंतर्गत मंदिर प्रांगण का शुद्धिकरण, प्रायश्चित पाठ, हवन-यज्ञ एवं गौदान जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे। इसके बाद शीघ्र ही मंदिर का पुनर्निर्माण उसी प्राचीन एवं पवित्र स्थान पर प्रारंभ किया जाएगा।

तीन ग्राम सभाओं की भूमिका आतिथ्य सत्कार की परंपरा से जुड़ी, सहयोग पर कोई प्रतिबंध नहीं

कुछ प्रिंट मीडिया में प्रकाशित खबरों में मंदिर पुनर्निर्माण के लिए केवल बदियाकोट, कालू एवं बोरबलड़ा गांव के लोगों द्वारा श्रमदान एवं आर्थिक सहयोग किए जाने की बात सामने आई थी। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए श्री गोविन्द सिंह दानू ने कहा कि माँ भगवती जगत जननी एवं समस्त सनातनी भक्तों की आराध्य देवी हैं। उनके लिए सभी श्रद्धालु समान हैं। मंदिर के पुनर्निर्माण में किसी भी दानूवंशी अथवा अन्य सनातनी श्रद्धालु के सहयोग के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बदियाकोट, कालू एवं बोरबलड़ा की तीनों ग्राम सभाओं का उल्लेख किसी प्रकार का भेदभाव या अन्य गांवों के श्रद्धालुओं को अलग करने के उद्देश्य से नहीं किया गया है। इन ग्राम सभाओं के ग्रामीणों की विशेष जिम्मेदारी मंदिर में आयोजित होने वाले धार्मिक पर्वों एवं अनुष्ठानों के दौरान बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और भक्तजनों के आतिथ्य सत्कार की रही है।

यह एक प्राचीन परंपरा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजनों, नंदाष्टमी के अवसर पर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले भव्य ‘सल्पाती मेले’, प्रत्येक आठ वर्ष में आयोजित होने वाले ‘घर आँठियों के मेले’ तथा प्रत्येक 12 वर्षों में होने वाली ‘माँ भगवती नन्दा उपजात यात्रा’ के दौरान देवीकुंड तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों एवं कार्यक्रमों में इन तीनों ग्राम सभाओं के ग्रामीण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस परंपरा के अंतर्गत प्रत्येक परिवार से गाय का घी, दूध, अनाज एवं अन्य आवश्यक सामग्री एकत्रित की जाती है, ताकि सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके और धार्मिक आयोजनों में आने वाले सभी श्रद्धालुओं का उचित आतिथ्य सत्कार किया जा सके। यह जिम्मेदारी इन तीन ग्राम सभाओं की पारंपरिक भूमिका को दर्शाती है, न कि पिण्डर घाटी मल्लादानपुर , विचला व तल्ला दानपुर के अन्य गांवों अथवा बाहरी क्षेत्रों में निवास करने वाले दानूवंशियों और सनातनी भक्तों के सहयोग पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध नही है ! अथवा कोई रेखा नही खीची गई है जो कि इन्हें अलग करें ! सभी दानूवंशियों व अन्य श्रद्धालु भक्तजनों के लिए माँ का दरबार हमेशा खुला है ! वो किसी जाति अथवा व्यक्ति विशेष की नही है , वो तो जगत जननी व बह्माण्ड की देवी है !

पारंपरिक हिमालयी एवं हूण स्थापत्य कला में बनेगा भव्य मंदिर

मंदिर कमेटी के अध्यक्ष एवं श्री गोविन्द सिंह दानू ने बताया कि माँ भगवती का पुनर्निर्मित मंदिर पहले से अधिक भव्य एवं दिव्य स्वरूप में निर्मित किया जाएगा। मंदिर का निर्माण उसी पवित्र देवस्थली पर होगा, जहां मान्यता के अनुसार माँ भगवती स्वयं चलकर छली एवं बली दानू को अपने साथ लेकर आई थीं।

मंदिर का निर्माण प्रसिद्ध पारंपरिक काष्ठ कला शैली, हिमालयी वास्तुकला एवं हूण स्थापत्य शैली के अनुरूप किया जाएगा। इसमें लकड़ी पर बारीक एवं आकर्षक नक्काशी सहित पारंपरिक शिल्पकला का विशेष ध्यान रखा जाएगा।

उन्होंने बताया कि यह देवस्थल अपनी विशिष्ट धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के लिए विशेष महत्व रखता है। यहां माँ भगवती के साथ तिब्बती परंपरा के हूण देवता एवं लाटू देवता की भी पूजा-अर्चना की जाती है। इस दृष्टि से यह मंदिर लोकमानस एवं मानसखण्ड मंदिर माला मिशन की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अंत में मंदिर कमेटी ने समस्त दानदाताओं, श्रद्धालुओं एवं भक्तजनों से पुनः अपील की कि मंदिर के आधिकारिक बैंक खाते, IFSC कोड एवं QR कोड जारी होने तक किसी भी व्यक्ति अथवा निजी खाते में धनराशि जमा न करें। मंदिर पुनर्निर्माण से संबंधित अधिकृत जानकारी केवल मंदिर कमेटी द्वारा सार्वजनिक की जाएगी।

इस अवसर पर श्री देव सिंह, श्री पुष्कर दानू (माँ भगवती के धामी), ग्राम प्रधान कालू श्री राजेन्द्र दानू, ग्राम प्रधान बदियाकोट श्री भूपेन्द्र कुमार, श्री केदार सिंह, श्री धर्मेन्द्र सिंह, श्री शिव सिंह, श्री दीवान सिंह, श्री सोनू दानू, श्रीमती रुक्मणी दानू, श्री होशियार सिंह, श्री दिनेश दानू सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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