बरसात में मार्ग बंद होने से , 11 किमी डोली का सफर, घायल ग्रामीण को बरसात में सड़क तक पहुंचाया
कपकोट। सड़क गांव तक पहुंचने के बावजूद बरसात में मार्ग बंद होने से ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। आपात स्थिति में आज भी ग्रामीणों को मरीजों को डोली के सहारे कई किलोमीटर पैदल ले जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसका ताजा उदाहरण सोराग गांव में देखने को मिला, जहां काम के दौरान गिरने से हर राम पुत्र खड़क राम के पैर में फ्रैक्चर हो गया।
घायल हर राम को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्राम प्रधान बलवंत सिंह दानू, पूर्व प्रधान चंद्र राम सहित ग्रामीणों ने करीब 11 किलोमीटर का सफर डोली के सहारे तय किया। ग्रामीणों ने बरसात के बीच ध्वस्त और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से पैदल चलकर घायल को सड़क मार्ग तक पहुंचाया। इसके बाद वाहन की मदद से उन्हें बागेश्वर अस्पताल ले जाया गया।
घायल को सड़क तक पहुंचाने में ग्राम प्रधान बलवंत सिंह दानू, पूर्व प्रधान चंद्र राम, पवन कुमार, स्वरूप राम, खीम राम, दान सिंह, रमेश राम, हुक्म राम, जयमल राम, दयाल राम समेत अन्य ग्रामीणों ने सहयोग किया। बारिश और खराब रास्ते के बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी और करीब 11 किलोमीटर तक डोली उठाकर घायल को सड़क तक पहुंचाया।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात शुरू होने से पहले विभागों की ओर से सड़क मार्गों को सुचारु रखने और बंद सड़कों को तत्काल खोलने के लिए मशीनरी तैनात करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश शुरू होते ही कई सड़कें जगह-जगह बंद हो जाती हैं। इसका खामियाजा सबसे अधिक आपात स्थिति में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ता है।
ग्राम प्रधान बलवंत सिंह दानू ने कहा कि गांव तक सड़क पहुंचने के बावजूद ग्रामीणों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा है। सड़क बंद होने पर लोगों को फिर पुराने दौर की तरह पैदल सफर करना पड़ता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर ग्रामीणों को सड़क सुविधा का पूर्ण लाभ कब मिलेगा।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सड़क के साथ ही संचार और बिजली व्यवस्था भी बरसात के दौरान लगातार प्रभावित रहती है। इससे ग्रामीणों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं। उन्होंने प्रशासन से पिंडर घाटी के ग्रामीणों की सुविधा के लिए धुर या कर्मी विनायक में एक एंबुलेंस तैनात करने की मांग की, ताकि आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
ग्रामीणों ने प्रशासन से बरसात में बंद होने वाले मार्गों को तत्काल खोलने, संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त मशीनरी तैनात करने और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग की है।


